Monday, August 13, 2018

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ख्याल का


ख्याल का ख्याल में ख्याल तक साथ रहा
जवाब का सवाल से सवाल तक साथ रहा

हुस्न ओ हवस का मजमा है, ये कूचा ए ज़माना,
शोहरत और शख्सियत का, जमाल तक साथ रहा

मुकम्मल था हमसफ़र, सफ़र कामिल न हो सका
मंज़िल और सफ़र का बस विसाल तक साथ रहा

किस अकीदत के साथ, मासूम बस्तियाँ जला दीं
ख़ुदा और इंसान का उस मशाल तक साथ रहा

पास था तो ज़रूरी न था, दूर हुआ जरूरत बन गया
फैसलों और फासलों का ये कमाल का साथ रहा



साकेत




मजमा - gathering
जमाल - beauty
कामिल - complete
विसाल - union
अकीदत - devotion



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