Sunday, November 2, 2014

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सियासत करता है...

दंगों पर लिखने की, हिमाकत करता है
लोग कहते हैं, वो सियासत करता है |

उसे बरसों पहले, लाशों पर, पड़े मिले, कुछ आँसू 
बेजुबाँ उन 'गवाहों' की, वकालत करता है |

'दरयादिल' से लोग थे, जख्म बांटा करते थे
ये शख्स पुराने ज़ख्मों पर, तिजारत करता है |

किस कौम के लोग थे, किस कौम के खिलाफ़ थे
कोई कौम भला कब दूजे से, यूँ नफरत करता है |

हलाक-ए-फेहरिस्त में बच्चे थे, इंसानियत का भी नाम मिला
ज़हर-ओ-फसाद कब किसपर, रियायत करता है |

वो सबकुछ जानकर बरसों से, बुत बनकर यूँ बैठा है
ये देखता है, बोलता है, तौहीन-ए-अदालत करता है |

'शरीफ़'
लोग, बहकाए गए, कत्ल-ए-आम को अमादा
ये लिखता है, कुछ करता नहीं, शरारत करता है |

मंदिर नहीं जाता, मस्जिद नहीं जाता
फसाद नहीं करता, तो इबादत करता है |

दंगों पर लिखने की, हिमाकत करता है
लोग कहते हैं, वो सियासत करता है |



- साकेत



तिजारत : व्यापार, सौदा / trade
हलाक-ए-फेहरिस्त : मृतकों की सूची / list of people dead
ज़हर-ओ-फसाद : दंगे का ज़हर / poison of a riot
तौहीन-ए-अदालत : अदालत की अवमानना / contempt of court