Thursday, February 7, 2013

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इज़हार...







“NOT everyone in this world has the fate to cherish the fullest form of love.
some are born ,just to experience the abbreviation of it.” 
― Ravinder SinghI Too Had A Love Story...




इज़हार-ए-मुहब्बत बयां 'उनको' करने
हम मुकम्मल-ए-गुलाब लिए बैठे थे |
इक दीदार हो जाये बस 'उनका'
ख्वाहिश-ओ-अरमां लिए बैठे थे |


इंतज़ार भी थक चुकी है 'उनके'...
इंतज़ार में अब आज |
छोड़ गई हैं खुशबुएँ भी अनसुना कर...
रूह-ए-गुलाब की आवाज़ |


बेशर्म खुशबुओं ने भी हए...
क्या खूब मुहब्बत निभाई है |
जाकर पूछो उस दीवाने गुलाब से...
जिसने कीमत-ए-मुहब्बत चुकाई है |


गम नहीं ए हमनशीं, 'तुझसे'
कोई शिकवा न शिकायत है |
शिकवा तो उन खुशबुओं से है...
बस उन्हीं से हर शिकायत है |


आज दूर खड़ी खुशबुएँ भी...
हँस रही हैं हमपर |
‘वो’ नहीं आये मिलने !
चिढा रहीं हैं हँस-हँसकर |


(क्या समझेंगी नासमझ बेवफ़ा खुशबुएँ)
बड़े ही शिद्दत से चाहा है ‘उनको’ हमने...
‘वो’ हैं कि मज़ाक समझ कर बैठे हैं |
(मज़ाक ही सही पर...)
आज भी इंतज़ार में 'उनके'...
हम वही महरूम गुलाब लिए बैठे हैं |




- साकेत    



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