Monday, May 4, 2020

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किस्सा नहीं है

इस मुल्क की तालीम का हिस्सा नहीं है
क्यों उसकी क़ुर्बानी का किस्सा नहीं है

चुनिंदा परछाईयों में गुम हैं कतरे लहू के
क्यों जहाँ ढूंढते हैं निशाँ, मिलता नहीं है

शाही कलम ने लिखी हैं, दास्ताँ ए आज़ादी
क्यों खद्दर लिखता है, बारूद लिखता नहीं है

किसी की सतवत में दबी है, किसी की गुमनामी
क्यों चमक का है, चीखों का चर्चा नहीं है

उम्दा कसीदे बुने हैं, हुक्मरानों की शान में
क्यों उस वरक़ से रंग ए खूँ मिटता नहीं है

किस सफ़ाई से, लिखी है सफ़ाई गुनाहों की
क्यों जो गवाह है, तेरा लिखा पढ़ता नहीं है

शान ए 'ज़फर' दर्ज़ हैं, रेशमी हर्फ़, सुनहरे सफ़हे
क्यों ज़ौक़ ए ज़माना, 'ग़ालिब' कोई मिलता नहीं है




साकेत




खद्दर - खादी, hand woven cotton
सतवत - influence, power
क़सीदे - written in praise of a king
वरक़ - paper
हुक्मरान - ruler 
हर्फ़ - word
सफ़हे - papers
ज़फ़र - Bahadur Shah Zafar (Mughal Emperor)
ज़ौक़ - Sheikh Ibrahim Zauq (Poet of the Mughal court)
ग़ालिब - Mirza Ghalib