Saturday, July 27, 2013

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किसी दोस्त के नाम...

मेरे अरमाँ के चरागों से...रोशन वो राह करना
जिस राह पर चलने को अबके...फिर खड़ा हुआ है कोई

कि इबादतों के बक्से से...कुछ जुगनू से चुरा लेना
सजा देना वो मंजिल पाने जिसको...फिर खड़ा हुआ है कोई

कि तेरी राह रोशन है...तेरी मंजिल भी रोशन होगी
ख़्वाब किसी के जीने जो अबके...फिर खड़ा हुआ है कोई

के घबरा मत जाना गर फिर भी...जो अँधेरे मिलें तुझे राहों में
देखना सितारों को हाथ बिछा अपने...तेरे पीछे खड़ा होगा कोई


- साकेत

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