Wednesday, July 15, 2015

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वाकिफ़ हूँ मैं...


ए वक्त तेरी फ़ितरत से वाकिफ़ हूँ मैं
ग़ालिब हूँ, अपनी किस्मत से वाकिफ़ हूँ मैं ‍‌

एक उम्र से इन दूरियों का लिहाज़ किया है मैंने
तेरे मेरे बीच की हर सरहद से वाकिफ़ हूँ मैं

सियासत की बिसात का कोई गुमनाम प्यादा हूँ
बादशाह! जज़्बात-ए-हुकूमत से वाकिफ़ हूँ मैं

मैंने हर इक दंगे में अपने बच्चे गवाएँ हैं
खुदा हूँ, इंसानी नफ़रत से वाकिफ़ हूँ मैं

बेबस अस्मत सुनाती है किस्से शराफ़त के
हवस हूँ, 'शरीफ़ों' की नीयत से वाकिफ़ हूँ मैं

वो इशारों के खेल, लटों को हलके से सहलाना
नज़र हूँ, हुस्न की हर हरकत से वाकिफ़ हूँ मैं

रफ़ाह-ए-कुरबत-ओ-वजा-ए-हिज़्र
दिल हूँ, उसकी उल्फ़त से वाकिफ़ हूँ मैं

सुन शरार-ए-आसमां-ओ-बाद-ए-ख़िज़ाँ
शज़र हूँ, अपनी ताकत से वाकिफ़ हूँ मैं

साकेत




अस्मत - honor
रफ़ाह-ए-कुरबत - pleasure of nearness
वजा-ए-हिज़्र - gloom of separation
उल्फ़त - love

शरार-ए-आसमां - lightning
बाद-ए-ख़िज़ाँ - wind of autumn/fall
शज़र - tree