Sunday, November 19, 2017

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नाम आते आते



ज़िन्दगी, किताब, किस्से, किरदार, नाम आते आते
के चंद पन्ने ही पलट सकें हैं हम, शाम आते आते

शब स्याह हुई, मेरे किस्से तेरी कहानियों से जा मिले
के सफ़र याद रह गया हमसफर! क़याम आते आते

कुछ वक्त की तल्खियाँ हैं, कुछ ज़माने के दायरे
रफ़्ता-रफ़्ता बहक रहा हूँ, जो तेरा नाम आते आते

तेरी सोहबत का असर है, अब तूफ़ां का डर नहीं मुझे
बेफ़िक्र परिंदे उड़ चले हैं, हवाओं का पयाम आते आते

खुमारी का आलम ये, के मैकदों की तलब नहीं, जुस्तजू नहीं
नशा भी कुछ यों के अब नशे में हूँ मैं, ये जाम आते आते

बेबाक हँसी रुख्सार पर, लबों पर मासूम तकाज़े
तेरे हो चलें हैं मेरे सारे हर्फ़, ये कलाम आते आते

दिल शीशे की बनावट है, इसे आफ़ताब-ए-हसरत है
टूट के जो बिखरे, तो संभाल लेना, अंजाम आते आते

जिंदगी किताब किस्से किरदार, नाम आते आते...

साकेत




शब - night
स्याह - black / dark
कयाम - halt / stay

तल्खियाँ - bitterness
रफ़्ता-रफ़्ता - gradually
सोहबत - association / companionship
पयाम - message
खुमारी - intoxication
मैकदा - bar
तलब - desire
जुस्तजू - quest
रुख्सार - cheeks
तकाज़े - demands
हर्फ़ - letters / alphabets
कलाम - a complete sentence / composition
आफ़ताब - sun

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