Wednesday, December 10, 2014

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कोई और होगा...

बहती हवा का शोर होगा
ध्यान से देख...कोई और होगा |

आंसुओं से लिख जाते थे खत कभी तुझको
वो भी भला कोई वक्त होगा...कोई दौर होगा |

तमाम शहर लूट कर वो महलों में बसता है
भूखे ने रोटी क्या चुरा ली...लोग कहने लगे 'चोर होगा' |

दरख़्त की तरह वो ताउम्र, रिश्तों के शाख जोड़ता रहा
रिश्ते यूँ पत्तों की तरह बिखरे...हवा का ज़ोर होगा |

वक्त क्या बदला, लोग भी बदल गए
इस ज़माने का यही तरीका...यही तौर होगा |

शांत आसमां है, सब कुछ देखता है, लोग भूल जाते हैं
इस आसमाँ का, बरसता हुआ कोई...छोर होगा |

वो इसी दुनिया में मिला मुझसे...जो अब सितारों में बसता है
आँखें नम हैं, दर्द वक्त के साथ...शायद कमजोर होगा |


- साकेत

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