Friday, December 12, 2014

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ए मेरी जिंदगी !

सहर सजेगी होली में फिर...
हर शाम दिवाली गाएगी
ए मेरी जिंदगी! तू मेरे साथ बैठ..
साथ बैठ और...इन्तेज़ार  कर..

'उसका'

के फिर किसी रोज तेरे पास
जब 'वो' मुझे ढूंढती आएगी
ए मेरी जिंदगी! तू उसके साथ बैठना
साथ बैठना और...इन्तज़ार करना

'मेरा'

के मैं आऊँगा वापस या
कोई हवा मेरी खबर लाएगी
ए मेरी जिंदगी ! हर हाल में 'मुस्कुराती' रहना
मुस्कुराना और...ख़याल रखना

'अपना'

- साकेत 

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