Thursday, September 5, 2013

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वो शिक्षक कहलाता है...


आज 5 सितम्बर है और कलम फिर चली है उसके लिए जो गर न होता तो शायद ये कलम कभी न चल पाती...उन सभी के नाम जिनसे आज तक कुछ न कुछ सिखने का मौक़ा मिला...उन सभी के नाम जिनसे आगे भी सीखने को मिलता रहेगा।





कि काली दीवारों पर सफ़ेद लकीरों से
नसीब हमारी लिख जाता है
वो शिक्षक कहलाता है जो
जीवन जीना सिखलाता है

पहली शिक्षक माँ होती है
संसार में हमें जो लाती है
लोरियां सुनाते बात ही बात में
जीवन से परिचय करवाती है

समय भी एक शिक्षक होता है
बहुत कुछ सिखला जाता है
व्यर्थ गंवाया समय भी आखिर
कहाँ लौट कर आता है 

शिक्षक वो ध्रुव-तारा है जो
दिशा बोध करवाता है
वो शिक्षक कहलाता है जो
चलने का मार्ग दिखाता है 

कि ज्ञान का दीपक लिए हाथ में
रोशन जग कर जाता है
कभी प्यार कभी डांट हम में
संस्कार कूट भर जाता है

शिक्षक अग्नि है हमें तपाकर
कुंदन का रूप दे जाता है
शिक्षक शीतल जल भी है जो
अपना अक्स हमें दिखलाता है 

मिट्टी को जैसे कुम्हार कोई
बर्तन की शक्ल दे जाता है
वो शिक्षक कहलाता है जो
इंसान को इंसान बनता है 

वो शिक्षक कहलाता है जो
इंसान को इंसान बनाता है
....



- साकेत 

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